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मंगलवार, 10 जुलाई 2018

इस धरती की हर मां कम्युनिस्ट होती है...!

इस धरती की हर मां कम्युनिस्ट होती है...!

त्रिभुवन
बहुत साल पहले की बात है। उन दिनों में स्कूली छात्र था और कम्युनिस्ट शब्द पहली बार कानों में पड़ा था। यह शब्द प्रयुक्त किया था एक सरदार साहेब ने, जिन्हें मैं नानाजी कहा करता था।

वे दिखने में साधु जैसे थे, लेकिन थे सरदार। घर में कारें-जीपें बहुत थीं, लेकिन मेरे बाबा से मिलने के लिए वे घोड़े पर आते थे। दोनों की दोस्ती की वजह घोड़े, उपनिषद चर्चा और सिख-इस्लाम या दार्शनिक विषय हुआ करते थे। वे उपनिषदों की बहुत सी कहानियां बड़े ही रोचक ढंग से सुनाया करते थे।

आरएसएस व देशभक्ति!संभव ही नही.....

आरएसएस व देशभक्ति!संभव ही नही

✍✍✍आपने घोड़े की झाप के बारे में सुना ही होगा!शादी में जो घोड़ा लाया जाता है उसके दोनों कानों को ढक दिया जाता है व दांए-बांए नहीं देख पाता।सिर्फ आगे की तरफ 60°एंगल में ही देख पाता है।आरएसएस से जुड़े जितने भी लोग होते है उनको त्रिवर्षीय कोर्स के प्रथम ईयर में ही यह झाप पहना दिया जाता है। Thought of bunch सरीखी आदर्शवादी किताबों के जरिये बंच ऑफ़ बुद्धू में तब्दील कर दिया जाता है।बस उसी एंगल से हर बात/मुद्दे को परिभाषित करना होता है।दुनियाँ की हर चीज को अलग-अलग एंगल से देखा जाएगा तो हटकर विचार पैदा हो सकते है जो संघी व्यवस्था अर्थात मनुवादी व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर देती है इसलिए दुनियाँ से एक्सपोज़र की सारी लाइने यह झाप पहनाकर काट दी जाती है।

✍✍✍आरएसएस अर्थात संघी व्यवस्था कभी भी अपने विचारधारा से किसी व्यक्ति को महान नहीं बनने देती।मनुवादी व्यवस्था व्यक्ति की उपयोगिता देखती है।उपयोगिता खत्म और काम तमाम!इसलिए किसी संघी को किसी और से कोई खतरा नहीं होता है।इस देश मे दो तरह के वर्ग है एक मेहनत के बल पर पूँजी पैदा करने वाला और दूसरा पूँजी से पूँजी पैदा करने वाला।आरएसएस अर्थात मनुवादी पूँजी से पूँजी पैदा करने वाले वर्ग के हित मे व्यवस्था बनाये रखने का काम करता है इसलिए संघ कभी किसान आत्महत्या,बेरोजगारी, भुखमरी,अशिक्षा,चिकित्सा ,गरीबी के लिए कोई आंदोलन नहीं करता है।

✍✍✍आरएसएस अर्थात संघी विरोधियों से निपटने के लिए चार तरीकों से काम करता है।पहला नजरअंदाज करना जैसे आप उनके विचारों/नीतियों का विरोध करते हो तो चुपचाप आपको नजरअंदाज कर दिया जाएगा।दूसरा विरोध करना यानी आरएसएस आपके बीच से ही पैदा किये अपने झाप पहनाए गुलामों से ही आपका विरोध करवायेगा ताकि आप आपस मे उलझकर ही अपना समय व ऊर्जा बर्बाद करते रहो।तीसरा हत्या यानि आरएसएस को लगने लगता है कि यह अब उनकी व्यवस्था के लिए खतरा बनता जा रहा है तो जो दिमाग मे नफरतों का जहर भरकर कट्टर उन्मादी तैयार किये है उनको अप्रत्यक्ष तौर पर उकसाता है कि देखो हमारे धर्म को गालियां दे रहा है!देश के विरोध में काम कर रहा है!जातिवाद फैलाकर  देश को तोड़ रहा है!फिर कलबुर्गी/गौरी लंकेश जैसे परिणाम सामने आते है!चौथा तरीका है खुद अपना लो अर्थात जब लगे कि किसी के साथ बड़ा जनमत जुड़ा हुआ है और उनसे सीधी टक्कर लेना संभव नहीं तो उसको खुद अपनाकर उनके विचारों में विकृतियां पैदा करके हत्या कर दी जाती है।गौतम बुद्ध विष्णु के अवतार,सरदार पटेल के साथ कांग्रेस ने अन्याय किया,महाराजा सूरजमल महान थे सरीखे परिणाम आपको देखने को मिलते है।

✍✍✍आरएसएस यानी संघी मनुवादियों का झुंड है।संघी मतलब सर्वश्रेष्ठ!यह एक श्रेष्ठी वर्ग है जो मानवता,नैतिकता,संविधान किसी को नहीं मानता है।यही कारण था कि अंडमान की सेलुलर जेल में महाराष्ट्र के 550कैदी थे सब वहीं मर गए लेकिन एक माफिवीर सावरकर बाहर आया था!महारानी विक्टोरिया को सलामी देते थे!देश की आजादी से इनका कोई लेना देना नहीं था।ये लोग अपनी व्यवस्था बनाये रखने की जद्दोजहद में फंसे हुए थे।इनकी व्यवस्था को खतरा आजादी के बाद शुरू होने वाला था इसलिए ये लोग अपनी ऊर्जा भविष्य के लिए बचा रहे थे।यही कारण रहा कि एक भी संघी देश की आजादी के लिए शहीद नहीं हुआ था।

✍✍✍आरएसएस यानी संघियों को खतरा मुसलमानों व ईसाइयों से था।कमेरा वर्ग तो इनका सदियों से गुलाम रहा था और आगे भी गुलाम बनाये रखने को लेकर अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा था।जब अंग्रेजों के समय सबको मतदान व प्रतिनिधित्व का अधिकार दिया जाने लगा तो तथाकथित लोकमान्य तिलक का गुस्सा फूट पड़ा और कहा "ये तेली-तम्बोली संसद में क्या करेंगे?"यही कारण रहा कि देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तब संघी मुसलमानों व ईसाइयों के खिलाफ नफरत की जहरीली फसल की बुवाई कर रहे थे इसी का परिणाम था कि आजादी के समय ये लोग संविधान व तिरंगे का विरोध कर रहे थे!ये लोग खुद को संविधान से ऊपर मानते है इसलिए आज तक आरएसएस का रेजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है क्योंकि संघ मनुस्मृति को सर्वोपरि मानता है व उसी व्यवस्था का पोषक है।

✍✍✍आरएसएस का विरोधियों को खत्म करने का चौथा नुस्खा अभी धड़ाधड़ चल रहा है कि अपनाकर/कब्जा करके मिलावट करके विकृत कर दो ताकि मनुवादी व्यवस्था के लिए लंबे समय तक कोई खतरा पैदा न हो!संविधान को 60°एंगल से परिभाषित किया जा रहा है!शिक्षण संस्थानों सहित हर लोकतांत्रिक व्यवस्था को झाप वाले 60°एंगल से सेट किया जा रहा है।सरकारी तंत्र में धीरे-धीरे 60°एंगल वाले इतने सेट कर दिए है कि न इनको शाखा लगाने के लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत पड़ती है न निक्कर पहनकर हाथों में लाठियां,तलवारे सहित हथियार लेकर पथ संचलन करने के लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत पड़ती है।झाप पहने पुलिस वाले कहते है कि हिन्दू संगठन ही तो कर रहा है!झाप पहने शिक्षक कहते है हमारा ही तो संगठन है स्कूल मैदान में करे तो क्या दिक्कत है!मोहल्ले वाले कहते है देशभक्त लोग है पार्क में दूब थोड़ी-बहुत खराब हो भी जाएगी तो क्या हो जाएगा!

मतलब संघी/मनुवादी व्यवस्था खुद को बनाये रखने के लिए संविधान,लोकतंत्र, मानवता,नैतिकता,मानवाधिकार आदि ठेंगे पर रखकर हर वो काम कर रही है जिससे एक सभ्य समाज,एक राष्ट्र कमजोर होता जाएं लेकिन विरोध उस अंदाज में नहीं होते जिस अंदाज में होना चाहिए क्योंकि झाप वाली 60°वालों की संख्या ज्यादा जुटा ली है व स्वतंत्र सोच,दुनियाँ से एक्सपोज़र रखने वाले लोग खामोश है।चाहे संविधान की हत्या कर दें लेकिन लोगों का बचना जरूरी है क्योंकि भगतसिंह आज भी दस्तावेजों में एक आतंकी ही तो है!

देशभक्ति के प्रमाणपत्र बांटने वालों का वीडियो देखिए।तिरंगे की होली जलाने वाले लोगों का तिरंगे के प्रति दिलों में सम्मान कभी नहीं हो सकता!

भाजपा के झंडे को राष्ट्रगान के साथ सलामी!
बस चले तो ये लोग करदे देश की ही नीलामी!!

प्रेमाराम सियाग

बुधवार, 16 मई 2018

धरातल पर गठबंधन


भीम आर्मी वालों नजर घुमाओ!तथाकथित दलित ब्राह्मणों के घरों की गंदगी साफ करके हाथ जोड़कर खड़ा रहता है कि जो मिल जाये वो ही मुकद्दर है और किसानों के खेत मे सहयोगी बनकर हफ्तावसूली कर रहा है!ब्राह्मणवादी व्यवस्था के गुलाम हमारे यहां भी है तो तथाकथित हिन्दू आपके यहाँ भी है।अगर ओबीसी/एस सी/एस टी को एकजुट चाहते हो तो दलित-दलित खेलने के बजाय किसान कौमों के साथ सामंजस्य बैठाओ👌

लोकतंत्र पर थूकता ब्राह्मणवाद!


लोकतंत्र पर थूकता ब्राह्मणवाद!
दो अप्रैल के भारत बंद में 17दलितों की हत्या कर दी गई और पंडित परशुराम की जयंती पर थानेदार ने हथियार न लहराने को बोला तो पहले तो उसके साथ बदतमीजी की गई व बाद में खुद एसपी साहब की मौजूदगी में माफी मंगवाई गई।ज्ञात रहे राजस्थान में सिर्फ 5%ब्राह्मण है!परंपरागत आरक्षण इस देश को खा रहा है या संवैधानिक आरक्षण खा रहा है आप खुद विश्लेषण कीजिये।
अगर थानेदार माफी नहीं मांगता तो ब्राह्मण आईजी उसको परेशान करते!ब्राह्मण महासभा का ब्राह्मण वकील झूठे इल्जाम लगाकर मुकदमा करता और ब्राह्मण जज उसको सजा देता और ब्राह्मण मंत्री उसको नौकरी से बर्खास्त करता!

राजा बलि से महाबली का भागवतपुराण....


राजा बलि से महाबली का भागवतपुराण....
उत्तर-पश्चिमी भारत मे राजा बलि की बहुत सी कथाएं प्राचीनकाल से ब्राह्मणों द्वारा गाई व सुनाई जाती रही है।आज भी जब भी ब्राह्मणों को दान/चंदे की जरूरत होती है तो राजा बलि का नाम लोगों के बीच महादानी के रूप में प्रचारित किया जाता है ताकि लोगों में दान देने का जोश पैदा हो!
जब राजा हिरण्यकश्यप ने ब्राह्मणों को अपने राज्य से बाहर निकाल दिया तो उसी के बेटे को बरगलाकर उसके खिलाफ खड़ा कर दिया गया।प्रहलाद को आगे करके उसकी बुआ होलिका व बाप हिरण्यकश्यप को खूब बदनाम किया गया और जनता को भड़काकर नरसिंह ब्राह्मण के नेतृत्व में सत्ता पर कब्जा कर लिया गया!

सोमवार, 14 मई 2018

मैँ बुद्ध की धरती से आया हूँ....



मैँ बुद्ध की धरती से आया हूँ....
आपने यह शब्द लगभग हर भारतीय प्रधानमंत्री, मंत्री या बड़े अधिकारी के मुंह से विदेशों में बोलते हुए सुना होगा।ऐसा क्या कारण है कि ये लोग देश मे हिन्दू-हिन्दू,श्रीराम का गुणगान करते है और विदेश जाते ही इनका सुर बदल जाता है!इसको जानने के लिए आइए इतिहास के झरोखों में लिए चलता हूँ व आपको बताता हूँ कि किस प्रकार यह बुद्ध की धरती है और किस प्रकार महात्मा बुद्ध अर्थात सिद्धार्थ बुद्ध से 2500 साल पहले से बौद्ध धर्म चला आ रहा था!