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मंगलवार, 31 जुलाई 2018

सामाजिक चेतना के चितेरे मुंशी प्रेमचंद

सामाजिक चेतना के चितेरे मुंशी प्रेमचंद
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असली नाम : धनपत राय
जन्म : 31 जुलाई 1880
जन्म- स्थल : वाराणसी के पास स्थित लमही गाँव
मृत्यु : 8 अक्टूबर 1936
लेखन की भाषा : उर्दू व हिंदी
रचनाओं का केंद्र: आम आदमी की संघर्षपूर्ण जिंदगी
रचनाओं का मुख्य कथ्य: ग्रामीण जीवन की विसंगतियां, विषमता, सामाजिक विद्रूपता, उत्पीड़न
शुरूआती लेखन
धनपत राय ने शुरुआत में उर्दू में 'नवाब राय' के नाम से लेखन किया। उनका पहला लघु उपन्यास 'असरार ए म आबिद' (हिंदी में – देवस्थान रहस्य) था, जिसमें उन्होंने मंदिरों में पुजारियों द्वारा धर्म की आड़ में की जा रही लूट-पाट और महिलाओं के साथ किये जा रहे शारीरिक शोषण को उज़ागर किया। उनका पहला कहानी संग्रह 'सोज़े-वतन' (अर्थात ' देश का दर्द' ) शीर्षक से 1908 में प्रकाशित हुआ। देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत होने के कारण इस पर अंग्रेज़ी हुकूमत ने रोक लगा दी और इसके लेखक को भविष्‍य में इस तरह का लेखन न करने की चेतावनी दी। 'सोजे-वतन' की सभी प्रतियाँ जब्त कर जला दी गईं।